कांग्रेस पार्टी ने आजकल बाबा लोगों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. पर भैये इसे राहुल बाबा नहीं दिख रहे है. अरे भाई चौंके न राहुल जी तो अभी भी बाबा ही है न ही ही ही. ४१ साला बाबा. बाबा वैसे पिता के पिता को कहते है. अपने दिग्गू भाई बोल दिए है की राहुल वह युवा नेता है जिनमे पी एम् बन्ने के सारे लच्छन मौजूद है. सो बुढऊ मनमोहन जी की शायद मियाद पूरी होने को है. अब बाबा रामदेव की दाढी लाख काली हो पर वह राहुल बाबा के रंगे पुते बालो के आगे थोड़ी ठहर सकते है. अब आप समझे के बाबा रामदेव क्यों दिल्ली से भगाए गए थे. अरे भाई पी एम् इन वेटिंग वाले बाबा को पी एम् को लपेटिंग वाले बाबा से डाह हो गया था. इस देश में एक ही बाबा होगा और वह होगा राहुल बाबा न की रामदेव बाबा. एक जंगल में दो ठू शेर थोड़े रह सकते है. अन्ना जी तो इसलिए बख्शे जा रहे है क्योंकि राहुल बाबा अभी अन्ना नही बने है मुला अन्ना बन्ने की झक सवार होने वाली है. अन्ना हजारे को सावधान हो जाना चाहिए. एक साथ बाबा और अन्ना दोनों बनेगे अपने राहुल जी. फिर का होगा अरे होगा का ऊ जो है न वेरोनिक्वा अरे उही जो कोलंबिया वाली है सोनिया के बाद बनेगी गाडमदर . अब बालीवुड तेरा क्या होगा. खैर अभी तो मै सोच रहा हूँ की भारत तेरा क्या होगा.
Tuesday, June 21, 2011
Friday, May 27, 2011
आड़ में लिया जाने वाला मजा गाढा मजा होता है
मौज मजे के कई रूप रंग होते है जो जन साधारण के आनंद का विषय होते है. किन्तु आज पाठको के वास्ते गाढ़ा मजा पेश कर रहा हूँ मुलाहिजा फरमाइयेगा(न फर्मायेगे तो भी हमार का कर लेगे ही ही ही). ये गाढ़ा मजा तब उत्पन्न होता है जब कोई काम आप आड़ में करते हो. मसलन अभी लखनऊ में कुछ बड़े ब्लागरों ने एक शैक्षिक समारोह की आड़ में सम्मान वाला परोगराम करा कर गाढे मजे का आनंद प्राप्त किया था. सुरेश कलमाड़ी गेम की आड़ में गाढ़ा मजा काटे. किन्तु अब सारे कामनवेल्थ गेम से सम्बंधित भ्रस्टाचारी कलमाडी की आड़ में गाढा मजा ले रहे है. बलागिंग तो खैर आभासी आड़ है ही भी बलागर एंड बलागिरायें इसी आभासी आड़ में गाढे मजे को प्राप्त हो रहे है.रात तो इसीलिये बनी ही है की उसकी आड़ में दुनिया के सारे चोर उचक्के कुकर्मी लुच्चे गाढ़े मजे की और उन्मुख हो. जनता हित की आड़ में (कु)नेता लोग कैसे गाढा मजा ले रहे है यह तो सबको विदित ही है.
तो साधो भाइयो मजे मौज की कथा अब आऊट डेटेड हो गयी है अब जमाना गाढे मजे का है.
Friday, May 20, 2011
भूलन ने चंचाली की मौज ले ली: अब पाठक न्याय करें
आज आप लोगों को एक सत्य घटना सुनाता हूँ . एक ठू रहे भूलन एक ठू रही चंचाली. दुन्नाऊ में गहरा प्रेम रहा. भूलन अच्छे अच्छों की मौज ले लेते थे. उनके मौज लेने में कोई बुरा भी नही मानता था. एक दिन चंचाली बड़े लाड में भूलन से बोली, सुनो चौधरी आज एक बात मन में आयी है. तुम सकी मौज लेते हो एक दिन मेरी भी मौज लो ना प्लीज़. भूलन मुसुकाते बोले धत घर में मौज नही ली जाती. बाहर ही ठीक. पर चंचाली ने त्रियाहठ पकड़ लिया. अंत में भूलन पतिधर्म निभाते हुए बोले, ठीक है ले लेंगे. चंचाली खुशी खुशी अपने काम में लग गयी.
इस बात को लगभग एक महीना बीत गया. भूलन कुछ बीमार से महसूस करने लगे. चंचाली ने जब पूछा तो बोले बैद्य जी को दिखाने गया था बोले शरीर में नमक जादा हो गया है. दो तीन दिन बाद भूलन खटिया पकड़ लिए. अब चंचाली चिंतित हो गयी. उसने अपने मायके से अपने भाई नन्हकू को बुला लिया. बड़े चिंतातुर होकर नन्हकू ने पूछा की जीजा क्या बात है, भूलन बोले क्या बताये रात में एक चुड़ैल आती है और मेरी पीठ चाटने लगती है. मेरे दात जम जाते है और बेहोशी छाने लगती है. तुम्हारी बहन से कह भी नही सकता. नन्ह्कुआ वीरोचित भाव लाते हुए बोला, जीएजा तनिको चिंता न करो आजै रात माँ ससुरी को पकड़ के न पटका तो तुम्हार साला नही.भूलन बोले ठीक. शाम को भूलन चंचाली से बोले जरा रात में मेरी पीठ चाट के बताना कि क्या वाकई नमक जादा हो गया का ? चंचाली बोली ठीक.
अब जब रात हुयी भूलन खटिया पे पड़ रहे. नन्हकू एक झौवे में जलता दिया रख कर खटिया के पीछे छिप गया. रात में अल्प्वस्त्र धारण किये हुए चंचाली आयी और भूलन का चादर हटाकर जैसे ही पीठ चाटने लगी तड से नन्ह्कुआ कूदा और चंचाली को उठा कर पटक दिया मुश्कें कसते हुए भाति भाँती की गाली देते हुए बोला, ससुरी जीजा को परेशान करने आये थी. इतने में भूलन उठे और दिए पर से झौवा हटा दिया. प्रकाश में जैसे ही नन्हकू ने अपनी बहन को देखा बड़ी जोर से भूलन की अम्मा दईया करते हुए वहा से भगा. चंचाली भी भागी. कुछ दूर जाकर वे दोनों भूलन की सात पुश्तों को तारने वाली गाली देने लगे.
सुबह नन्हकू ने पंचायत बुलाई
अब मै सभी पाठको पर छोड़ता हूँ कि वे निर्णय करे कि न्याय की क्या मांग है.
Wednesday, May 18, 2011
टरई न टारे मटरुआ चाहे भुईं गड़हा होई जाय.
बस्ती जिले में एक कहावत है की टरई न टारे मटरुआ चाहे भुईं गड़हा होई जाय. कहावते सार्वभौमिक होती है. चलिए इस कहावत का मतलब बता दें. माने कि हम जहा खड़े है वही खड़े रहेगे चाहे जमीन में गड्ढा क्यों न हो जाय. किसी के हटाये नही हटेगे. ब्लागिस्तान में गड़हा खुद रहा है और मटरू भाई कह रहे है कि गडहे में कूदी जैबे मुला एक बार में दस ठू पोस्ट लिखी से बाजू न आयेगे. ये मटरू भाई का ही कमाल है कि दिना भर कम्पूतरवा के चोंच से चोंच भिडाये रहते है कि कब टिप्पणी रूपी चारा दिखे और गड़प कर जाय. एक मटरू ने बाकायदा टिप्पणी का बगीचा तक उगा डाला है. ऐसे ही सभी लोग बगीचा उगाते रहे तो ब्लॉग दुनिया हरी भरी हो जायेगी और ग्लोबल वार्मिंग ख़तम.
अरे मटरूओं जो हियाँ स्क्रीनिया माँ दिन भर घुसे रहते हो उसका अध हिसा समय अपने आस पास कि समस्यायों को देखने और विचार करने में लगाओ तो बात बने. तुम लोग आब्सर्व तो करते हो पर सारा आब्जर्वेशन पोस्ट की टिप्पणी में घुस जाता है. सो जरा बलाग, फेसबुक ऑरकुट चिरकुट से बहार आओ. देखो कि कित्ता बड़ा गड्ढा खुद गया है इस समाज में. आभासी से वास्तविकता कि और चलो जवानो.
सूर्यभान चौधरी
Saturday, May 14, 2011
जबरिया लिखौ या खबरिया लिखौ कौनो बात नहीं .पर जबरिया पढाओ जबरिया कराओ जबरिया हँसाओ. जे कौनो बात है?
वर्तमान युग जबरदस्ती का युग है. पहले के समय में मान मनुहार से लोग काम चला लेते थे. मतलब की मान मनौव्वल से हर काम ठीक ठाक तरीके से निपट जाता था.अब मान तो रहा नही मनौव्वल भी धीरे से सरक लिया. सो भाई लोगो ने जबरदस्ती का फंडा बना डाला. हमारे सुकुल जी ने तो ऐलान ही कर दिया था की हम तो जबरिया लिखबै. जबरिया लिखौ या खबरिया लिखौ कौनो बात नहीं .पर जबरिया पढाओ जबरिया कराओ जबरिया हँसाओ. जे कौनो बात है? लाफ्टर चैनल वाले जबरिया हसाने के चक्कर में जार जार रुला रहे है. हिया बलाग जगत में एक्कै पोस्ट ससुरी दस जगह पडी मिलती है.
अब पढे के पडी. बलाग पे डाला, फेस्बुकियाया, आर्कुटई चिरकुटई भी कर दी. फिरू मन नही माना.
माने कईसे चंचल जो घोषित हुआ है. प्रवृत्ति से विवश.
भला हो हमारीवाणी का चिरकुट टाईप के लोगन से मुक्ति दिलाई दीस. काल ब्लागर बाबा कोहा गए की लिख लिख के बेडा गर्क किये हमार और पोस्ट दिख रही फेसबुक पर. ई बड़ा जुलुम हवे. अरे स्वनाम धन्य महाप्रभुओं
एक पोस्ट ही लिखो पर ठीक ठाक लिखो. ऐसा लिखो की लोग ढूंढें की पोस्ट कहा लिखी है,तो कोई बात है. पता चला की एक कंकड़ उठा के मारा ससुर जेहर गिरा वही पोस्ट बिराजमान है.
... सूर्यभान चौधरी
Tuesday, May 10, 2011
ब्लागिंग से घटती कार्यक्षमता और बढ़ता मानसिक तनाव(ब्लोमेयोपिया)
ब्लागिंग से सम्बंधित एक सर्वे में यह निष्कर्ष सम्मने आया है ....
१. कार्यस्थल पर व्यक्ति के पास उपलब्ध नेट का अधिकतम इस्तेमाल ब्लागिंग में किया जाता है फलतः व्यक्ति का सारा ध्यान कार्य की और न होकर ब्लाग और उस पर आयी टिप्पणियों की तरफ होता है.
२. २४ घंटे में व्यक्ति १८ घंटे ब्लाग और उससे जुड़े मुद्दों के बारे में सोचता रहता है
३. ब्लागिंग के चलते गुटबाजी होने से व्यक्ति के मन में असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है.
४. व्यक्ति के आँखों पर लगे चश्मे का नंबर बढ़ता जा रहा है.
५. ब्लागिंग में डूबे रहने की वजह से घरेलू और सामाजिक विवाद बढ़ रहे है.
६. ईट ब्लागिंग ड्रिंक ब्लागिंग की वजह से एक नया रोग सामने आ रहा है जिसे वैज्ञानिको ने "ब्लोमेयोपिया" का नाम दिया है.
७.ब्लोमेयोपिया के वायरस फैलाने और लोगो को रोगग्रस्त बनाने का कार्य सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है इसमें उन ब्लागरो को लगाया गया है जो अमेरिका और अरब देशो से चंदा प्राप्त करते है.
अंत में सनद रहे की ब्लागिंग परमाणु ऊर्जा की तरह है इसका सदुपयोग मानवता को विकास के चरम तक पंहुचा सकता है लेकिन यदि इसका दुरुपयोग करके ब्लोमेयोपिया को फैलाया गया तो यह आभासी के साथ वास्तविक दुनिया को नष्ट कर डालेगा.
१. कार्यस्थल पर व्यक्ति के पास उपलब्ध नेट का अधिकतम इस्तेमाल ब्लागिंग में किया जाता है फलतः व्यक्ति का सारा ध्यान कार्य की और न होकर ब्लाग और उस पर आयी टिप्पणियों की तरफ होता है.
२. २४ घंटे में व्यक्ति १८ घंटे ब्लाग और उससे जुड़े मुद्दों के बारे में सोचता रहता है
३. ब्लागिंग के चलते गुटबाजी होने से व्यक्ति के मन में असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है.
४. व्यक्ति के आँखों पर लगे चश्मे का नंबर बढ़ता जा रहा है.
५. ब्लागिंग में डूबे रहने की वजह से घरेलू और सामाजिक विवाद बढ़ रहे है.
६. ईट ब्लागिंग ड्रिंक ब्लागिंग की वजह से एक नया रोग सामने आ रहा है जिसे वैज्ञानिको ने "ब्लोमेयोपिया" का नाम दिया है.
७.ब्लोमेयोपिया के वायरस फैलाने और लोगो को रोगग्रस्त बनाने का कार्य सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है इसमें उन ब्लागरो को लगाया गया है जो अमेरिका और अरब देशो से चंदा प्राप्त करते है.
अंत में सनद रहे की ब्लागिंग परमाणु ऊर्जा की तरह है इसका सदुपयोग मानवता को विकास के चरम तक पंहुचा सकता है लेकिन यदि इसका दुरुपयोग करके ब्लोमेयोपिया को फैलाया गया तो यह आभासी के साथ वास्तविक दुनिया को नष्ट कर डालेगा.
Tuesday, May 3, 2011
खानदानी शफाखाना: शौचक्रिया करने और कराने में माहिर, डॉ जानवर शौचाल
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